एनएचआरसी यानी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वकील की इस शिकायत को बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजते हुए उचित कार्रवाई के लिए मामले को देखने को कहा। अधिवक्ता हरिओम जिंदल की आरटीआई के सवाल के जवाब में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन्हें पत्र दवारा सूचित किया है कि चूंकि यह नीतिगत मुद्दा है इसलिए इस मुद्दे पर बार काउंसिल में फुल हाउस में विचार किया जाएगा। पत्र में कहा गया है कि इस मामले को सामान्य परिषद के समक्ष रखा जाएगा।
कानून रिव्यू/नई दिल्ली
ऐसा कोई कानून या नियम नहीं है कि कोर्ट की कार्यवाही या पैरवी के दौरान वकील खड़े ही रहेंगे। कोर्ट में वकीलों के खड़े रहने के लिए कोई नियम नहीं है। वकील अक्सर जज के सामने घंटों खड़े रहते हैं। कोर्ट के कामकाज के दौरान खड़े रहना वकीलों की आदत में शुमार हो गया है, लेकिन लुधियाना के एक वकील ने इस प्रथा के खिलाफ आवाज़ उठाई है। लुधियाना में जिला अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता हरिओम जिंदल ने इस प्रथा के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया। वे यह लड़ाई महीनों से लड़ रहे हैं और अब जाकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन्हें पत्र लिखकर सूचित किया है कि यह मुद्दा बार की बैठक में उठाया जाएगा। एनएचआरसी यानी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वकील की इस शिकायत को बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजते हुए उचित कार्रवाई के लिए मामले को देखने को कहा। अधिवक्ता हरिओम जिंदल की आरटीआई के सवाल के जवाब में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन्हें पत्र दवारा सूचित किया है कि चूंकि यह नीतिगत मुद्दा है इसलिए इस मुद्दे पर बार काउंसिल में फुल हाउस में विचार किया जाएगा। पत्र में कहा गया है कि इस मामले को सामान्य परिषद के समक्ष रखा जाएगा। जिंदल के अनुसार न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की मूल योग्यता में कोई अंतर नहीं है। बीसीआई ने जिंदल की आरटीआई के सवाल के जवाब में बताया कि इस मुद्दे पर नियम खामोश हैं। एनएचआरसी के समक्ष अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि लोक सेवकों द्वारा अधिवक्ताओं के साथ व्यवहार करने के तरीकों में लगातार गिरावट आई है। न्यायाधीशों, अदालतों में और विभिन्न प्राधिकरणों के माध्यम से प्राप्त जानकारी से यह स्पष्ट है कि कोई नियम नहीं है। जिंदल के अनुसार यह मुद्दा हर अधिवक्ता की गरिमा और सम्मान से संबंधित है।