साइबर क्राइम नोएडा पुलिस ने पर्सनल लोन के नाम पर फर्जी सेंक्शन लेटर भेजकर ठगी करने वाले गैंग के दो साइबर अपराधी दबोचे, 3.40 लाख रुपये की धोखाधड़ी की रकम खातों में मिली

नोएडा। पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के थाना साइबर क्राइम नोएडा पुलिस ने पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर लोगों को फर्जी लोन सेंक्शन लेटर भेजकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ठगी करने वाले साइबर गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो वांछित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल विश्लेषण, सर्विलांस और गोपनीय सूचना के आधार पर 2 सितंबर 2026 को खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद से गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, थाना साइबर क्राइम नोएडा में दर्ज मु0अ0सं0 145/2025, धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 238 भारतीय न्याय संहिता एवं 66D आईटी एक्ट में दोनों आरोपी वांछित चल रहे थे। जांच में सामने आया कि यह गिरोह RuLoans कंपनी से प्राप्त डाटा का दुरुपयोग कर लोन की जरूरतमंद लोगों को व्यक्तिगत लोन दिलाने का झांसा देता था। इसके बाद पीड़ितों को फर्जी लोन सेंक्शन लेटर भेजकर प्रोसेसिंग फीस सहित अन्य शुल्क के नाम पर रकम ठगी जाती थी।
इस मामले में पुलिस द्वारा पूर्व में दो आरोपियों को 15 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इसी क्रम में तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल नेटवर्क के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने गिरोह के दो अन्य वांछित सदस्यों को गिरफ्तार किया।
10 प्रतिशत कमीशन पर साइबर अपराधियों को देते थे बैंक खाते
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे अपने बैंक खातों को साइबर अपराधियों को 10 प्रतिशत कमीशन पर किराये पर उपलब्ध कराते थे। इन खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम मंगाई जाती थी। इसके बाद आरोपी प्राप्त रकम में से अपना कमीशन काटकर बाकी धनराशि संबंधित साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा देते थे।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी तुषार के बैंक खाते में 1.20 लाख रुपये तथा सुमित के बैंक खाते में 2.20 लाख रुपये, यानी कुल 3.40 लाख रुपये धोखाधड़ी की रकम प्राप्त हुई थी। इन बैंक खातों के संबंध में विभिन्न राज्यों में NCRP पोर्टल पर महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कुल दो शिकायतें भी दर्ज हैं।
म्यूल बैंक खातों के जरिए चलाते थे ठगी का नेटवर्क
जांच में सामने आए अपराध के तरीके के अनुसार, आरोपी अपने बैंक खातों के साथ-साथ विभिन्न म्यूल (MULE) बैंक खातों को भी 10 प्रतिशत कमीशन पर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। रकम खाते में आने के बाद आरोपी अपना कमीशन निकालकर शेष धनराशि साइबर अपराधियों को दे देते थे।
पुलिस ने मामले में अन्य सहयोगियों, बैंक खातों, वेबसाइटों और डिजिटल नेटवर्क की जांच भी शुरू कर दी है। जांच के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में भी कार्रवाई की जा सकती है।
गिरफ्तार आरोपी
1. तुषार पुत्र कपिल देव, निवासी खोड़ा कॉलोनी, थाना खोड़ा, गाजियाबाद, उम्र 21 वर्ष।
2. सुमित कुमार पुत्र रामेश्वर प्रसाद, निवासी खोड़ा कॉलोनी, थाना खोड़ा, गाजियाबाद, उम्र 21 वर्ष।
साइबर पुलिस की लोगों से अपील
साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि साइबर ठगी होने पर बिना देरी किए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें अथवा National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी पुलिस अधिकारी, CBI, ED, नारकोटिक्स विभाग या इनकम टैक्स अधिकारी फोन पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकता। यदि कोई व्यक्ति अधिकारी बनकर कॉल करे और डिजिटल अरेस्ट, अश्लील वीडियो, मादक पदार्थों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला अथवा फर्जी इंपोर्ट-एक्सपोर्ट में संलिप्त होने की बात कहकर डराए, तो घबराएं नहीं और तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत करें।
पुलिस ने नागरिकों से यह भी अपील की है कि WhatsApp या कॉल पर मिलने वाले फर्जी इन्वेस्टमेंट ऑफर पर भरोसा न करें, किसी अनजान लिंक को ओपन न करें और किसी अनजान व्यक्ति के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड अथवा बैंक खाते की जानकारी साझा न करें। साइबर अपराध से संबंधित शिकायत के लिए 1930 पर संपर्क करें या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज कराएं।
